
ग्लोबल ट्रेड वॉर के मैदान में अब एक और बड़ा खिलाड़ी कूद पड़ा है. डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ की तलवार लहराने के बाद, अब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी चीन को उसी भाषा में जवाब देने की ठान ली है. मैक्रों ने बीजिंग को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर चीन ने यूरोप के साथ अपने बढ़ते व्यापार घाटे को कम नहीं किया, तो यूरोपीय यूनियन भी अमेरिका की तर्ज पर चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा. फ्रांसीसी अखबार लेस इकोस को दिए एक धमाकेदार इंटरव्यू में मैक्रों ने अपनी हालिया चीन यात्रा के दौरान हुई वार्ताओं का खुलासा किया. उन्होंने इसे यूरोपीय उद्योग के लिए जीवन और मृत्यु का सवाल बताया है. इसके साथ ही उन्होंने नई डील का ऑफर भी दिया है. यह भारत के लिए गोल्डन चांस की तरह है.
मैक्रों का सबसे तीखा हमला चीन की एकतरफा व्यापार नीति पर था. उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि मैंने चीनी लीडरशिप को समझाने की कोशिश की कि उनका मौजूदा ट्रेड सरप्लस अस्थिर है. मैक्रों ने कहा, चीन अपने ही ग्राहकों को मार रहा है. वे हमसे सामान खरीदना बंद कर चुके हैं, लेकिन अपना सामान हमें बेचे जा रहे हैं. अगर ग्राहक ही आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा, तो चीन अपना माल किसे बेचेगा? यह बयान इस बात का संकेत है कि यूरोप अब चीन के डंपिंग ग्राउंड बनने को तैयार नहीं है. मैक्रों ने साफ कर दिया कि व्यापार दोतरफा रास्ता है, और मौजूदा असंतुलन अब बर्दाश्त के बाहर है.
‘आने वाले महीनों में कड़े कदम उठाएंगे’
मैक्रों ने अपनी बातचीत में केवल शिकायतें नहीं कीं, बल्कि एक समय सीमा के साथ धमकी भी दी. उन्होंने कहा, मैंने उन्हें (चीन को) बता दिया है कि अगर वे प्रतिक्रिया नहीं देते हैं और हालात नहीं सुधारते, तो हम यूरोपीय लोग मजबूर हो जाएंगे. आने वाले महीनों में हमें अमेरिका का उदाहरण फॉलो करना पड़ेगा और चीनी उत्पादों पर सख्त टैरिफ लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ेंगे. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक यूरोप, अमेरिका की तुलना में चीन के प्रति थोड़ा नरम रुख अपनाता रहा है. लेकिन मैक्रों का यह बयान ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ के अंत का संकेत है.
