नगर पंचायत कंपिल में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हुई धांधली को लेकर शनिवार को बड़ी संख्या में लोगों ने तहसील परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में नगर पंचायत के सभासदों के साथ सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि योजना के तहत अपात्र लोगों को आवास दिए गए हैं, जबकि वास्तविक पात्र और जरूरतमंदों को सूची से बाहर कर दिया गया है।
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद अपर जिलाधिकारी (एडीएम) सुभाष चंद्र प्रजापति और क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुरभि मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सभासदों का आरोप: टीम गठित कर अपात्रों को लाभ दिलाया गया
कायमगंज।
सभासदों ने बताया कि उन्होंने 2 अप्रैल को जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र सौंपा था, जिसमें योजना में अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा एक जांच टीम का गठन किया गया, लेकिन आरोप है कि नगर पंचायत की चेयरमैन और उनके पूर्व चेयरमैन पुत्र ने इस टीम और स्थानीय लेखपाल से साठगांठ कर अपात्रों को पात्र घोषित करवा दिया।प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से नगर पंचायत की सीट संख्या 91, 1206, 752, और 88 में हुई धांधलियों का उल्लेख करते हुए मांग की कि इन क्षेत्रों से जुड़ी जांच को हटाकर एक नई, निष्पक्ष टीम गठित की जाए।
विधायक और एडीएम ने जताई गंभीरता
कायमगंज।
मौके पर पहुंचे विधायक डॉ. सुरभि ने कहा कि आवास योजना का लाभ केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए। किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति ने भी कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों को किसी भी हाल में योजना से वंचित नहीं किया जाएगा।
लोगों की मांग – योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी
कायमगंज।
प्रदर्शन के दौरान मौजूद कई महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने समय पर आवेदन किया था, लेकिन उनके नाम सूची से हटा दिए गए। वहीं, ऐसे लोग सूची में शामिल हैं जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। लोगों ने योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर नगर पंचायत कंपिल में उठे सवाल प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। प्रदर्शन के बाद अधिकारियों द्वारा जांच का भरोसा तो दिया गया है, लेकिन जब तक निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक लाभार्थियों का विश्वास बहाल कर पाना मुश्किल होगा।