
पिछले कुछ दशकों में युद्ध का तरीका बहुत बदल गया है. एक समय था, जब जमीन पर उतरने वाली सेना ही तय करती थी कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा, पर अब ऐसा नहीं है. एक देश के पास मौजूद टेक्नोलॉजी और हवाई हमले ये तय करते हैं वो रणभूमि में कितना टिकेगा. जिसकी जितनी एडवांस तकनीक, वो उतना ही ताकतवर. इसका उदाहरण हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा, जब भारत की ओर से इजरायली ड्रोन ने बवाल मचाया था. अब एक और ऐसा ही अस्त्र इजरायल के जरिये हमारी सेना के तरकश में आ सकता है.
दरअसल इजराइल का बेहद चर्चित लेजर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम अब फ्रंटलाइन पर तैनाती के लिए तैयार है. पिछले 10 साल के डेवलपमेंट और टेस्टिंग के बाद इजरायल ने दुनिया का पहला ऐसा लेजर एयर डिफेंस सिस्टम बना लिया है, जो पूरी तरह ऑपरेशनल स्थिति में काम करेगा. इजराइल डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ब्रांच के प्रमुख डैनी गोल्ड ने DefenceTech Summit में कहा कि सिस्टम पूरी तरह से तैयार है और IDF को यह 30 दिसंबर, 2025 तक सौंपने की प्लानिंग है.
कितना ताकतवर है इजरायल का आयरन बीम?
इजरायल की कंपनी रफायल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने इसे बनाया है और इसका कहना है कि Iron Beam 450 वर्जन ने अपने सभी अंतिम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं. इस लेजर सिस्टम ने रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन (UAV) को बेहद तेजी और सटीकता से मार गिराया. बड़ी बात ये है कि हर इंटरसेप्शन की लागत लगभग जीरो है यानि ये बेहद किफायती भी है. रफायल की मानें तो यह एयर डिफेंस के क्षेत्र में दुनिया का नया मानक साबित हुआ है और यह इजराइल की मौजूदा मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम में आसानी से शामिल हो जाता है. इसे इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम को रिप्लेस नहीं करेगा बल्कि इसके साथ मिलकर काम करेगा. ऐरो और डेविड्स स्लिंग के साथ भी ये एडजस्ट हो जाएगा. इससे फायदा ये होगा कि यह छोटे और करीब से आने वाले खतरों को जीरो लागत के साथ खत्म कर देगा, जबकि मिसाइल आधारित सिस्टम बड़े और जटिल खतरों को संभालते रहेंगे.
