आक़िल गौर

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर के साथ करीब 5 घंटे तक एक अहम और बहुप्रतीक्षित बैठक की. इस बैठक को लेकर काफी उम्मीदें थीं क्योंकि यह बातचीत अमेरिकी शांति योजना पर केंद्रित थी. हालांकि नतीजा वैसा नही रहा, जैसी उम्मीद थी. लम्बी चर्चा के बावजूद दोनों पक्ष किसी बड़े समझौते पर नहीं पहुंच सके. एक बार फिर से शांति वार्ता का कांटा यूक्रेन के विवादित इलाकों पर जाकर टिक गया और कोई निर्णायक समझौता नहीं हो पाया.
पुतिन के वरिष्ठ सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि बातचीत उपयोगी और रचनात्मक रही, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है. उन्होंने साफ बताया कि अभी तक ऐसा कोई संयुक्त प्रस्ताव तैयार नहीं हो पाया है, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें. उशाकोव के मुताबिक अमेरिका की कुछ बातें रूस मानने को तैयार है, लेकिन कई सुझाव ऐसे हैं जिन पर सहमति नहीं हो सकती. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 300 मिनट की बातचीत के बाद भी न किसी बिंदु पर ठोस सहमति बनी और न ही पुतिन-ट्रंप के बीच किसी नई बैठक पर बात आगे बढ़ सकी.
‘ऐसा न हो कि समझौते की सूरत ही न बचे’
इस बैठक से ठीक पहले पुतिन ने यूरोपीय देशों के सख्त संदेश देते हुए कहा था कि पूर्वी यूक्रेन के शहर पोकरोव्स्क पर रूस का कब्जा उनके विशेष सैन्य अभियान के शुरुआती लक्ष्यों को पूरा करने का एक मजबूत आधार है. इसके साथ ही पुतिन ने गरजते हुए कहा कि यूरोप युद्ध समाधान में बाधा डाल रहा है. पुतिन ने चेतावनी दी- ‘हम यूरोप से युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर यूरोप युद्ध शुरू करता है, तो हम तैयार हैं. यूरोप की हार इतनी पक्की और पूरी होगी कि शांति समझौता करने के लिए भी कोई नहीं बचेगा.’
