
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुन कई बड़े अधिकारियों के दफ्तर में हलचल मच गई और उनकी नींद उड़ गई. यहां के जानकीपुरम में रहने वाले एक बुजुर्ग के पास कॉल आती है जो उसे पहलगाम टेरर अटैक का आरोपी बताकर 5 दिन डिजिटल अरेस्ट रखता. इतना ही नहीं जालसाजों ने 5 दिनों में बुज़ुर्ग से बड़ी चालाकी से अलग-अलग बैंक खातों में थोड़े बहुत नहीं बल्कि 27 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए. बुजुर्ग का नाम शंकर त्रिवेदी है और उनकी उम्र 77 वर्ष है. वह लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में रहते हैं और आरोपियों ने बुजुर्ग से ठगी एटीएस, एनआईए का अधिकारी बताकर की है.
यह कहानी शुरू होती है 7 नवंबर की दोपहर को, जब रामशंकर त्रिवेदी अपने घर में आराम कर रहे थे, तभी उनके पास व्हाट्सएप कॉल आती है. कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड का अधिकारी बताया. कड़क आवाज में ठग ने रामशंकर त्रिवेदी से कहा कि आपने आतंकियों को 70 करोड़ रुपए की मदद की. जिसके कमीशन के रूप में आपके खाते में 70 लाख रुपए आए हैं. राम शंकर त्रिवेदी के इनकार पर वर्दी पहने युवक ने वीडियो कॉल की. खुद को एनआईए अधिकारी बताते हुए रामशंकर त्रिवेदी को आतंकी साजिश में शामिल बताया.
पीड़ित से कहा गया कि आपके बैंक खाते की सारी रकम की जांच होगी. जांच में सब ठीक मिलने पर रकम वापस कर दी जाएगी. ठगों ने धमकाया कि ऐसा न करने पर आपका बुढ़ापा जेल में ही कटेगा. जालसाजों ने राम शंकर त्रिवेदी को दो बैंक खाते दिए और उसमें अपनी पूरी रकम जमा करने को कहा. पीड़ित ने 10 नवंबर को 10 लाख, 11 नवंबर को 17 लाख रुपए उन खातों ने आरटीजीएस कर दिए. ठगों की डिमांड बढ़ने पर रामशंकर त्रिवेदी को शक हुआ. परिजनों को जानकारी देने पर एफआईआर दर्ज कराई गई. एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच में लखनऊ साइबर पुलिस जुटी है.
