GSP NEWS चैनल प्रदेश प्रभारी जुल्फिकार खान फर्रुखाबाद
इमामे हुसैन ने अपने 72 अज़ीजो के साथ करवाल की रेत पर तपती धूप में शहादत दी। हाजी व हाफिज रियाज़ अहमद निवासी मोहल्ला गड़ी अशरफ अली फर्रुखाबाद ने कहा कि इस्लामिक नव वर्ष की शुरुआत मोहर्रम चांद की पहली तारीख को होती है हाजी जी ने कर्वला का जिक्र करते हुए बताया कि इमामे हुसैन की पैदाइश 3 शाबान 4 हिजरी (लगभग 11 जनवरी 626 ईस्वी मदीने में हुई थी इमामे हुसैन के बड़े भाई हजरत इमामे हसन थे और उनके वालिद हजरत अली थे उनकी मां हजरत फातिमा थी जो पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी थी इमाम हुसैन का कहना था सच्चाई पर चलना और सच्चाई के लिए लड़ना चाहिए इमाम हुसैन की शहादत आज भी दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरित करती है 680 में इमाम हुसैन ने यजीद की खिलाफत के खिलाफ आवाज उठाई जो उस समय का खलीफा था यजीद एक जुल्म करने वाला शासक माना जाता था इमाम हुसैन ने इंसाफ और सच्चाई की हिफाज़त के लिए कर्बला के मैदान में अपने परिवार अज़ीज़ साथियों के साथ कर्बला के मैदान में यजीद की बैत ना करते हुए यजीद की सेना का मुकाबला किया कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन और उनके 72 अज़ीज साथियों को 10 मोहर्रम को शहीद कर दिया गया तारीख गवाह है जब मोहर्रम शुरू होते है इमाम हुसैन की शहादत पर उनकी याद में अकीदत मंद शिरनी पर फाहतीया दिलाकर रिसाले सबाब करते हैं हाजी जी ने कहा कि हमारा उन सभी मोमिन भाई और बहनों से कहना है जितना भी हो सके कुरान की तिलावत कर के बख्श दे उन सभी शहीदोंंं के नाम