आक़िल गौर पत्रकार उत्तराखंड

कई सालों से वेनेजुएला की राजनीति में लोकतंत्र और आजादी की सबसे मुखर आवाज मानी जाने वाली मारिया कोरीना माचाडो आखिरकार नॉर्वे पहुंच गईं. यहां उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनकी बेटी एना कोरीना सोसा ने उनकी ओर से पुरस्कार ग्रहण किया और समारोह में कहा कि उनकी मां जल्द ही वेनेजुएला लौटना चाहती हैं क्योंकि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ. कई महीनों बाद सार्वजनिक तौर पर मारिया नॉर्वे में दिखीं. हालांकि यहां पहुंचना किसी आम फ्लाइट का सफर नहीं था. उन्हें देश से बाहर निकालने के लिए अमेरिका ने एक सीक्रेट और बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन चलाया गया, जो करीब 16 घंटे तक चलता रहा.
माचाडो लगभग एक साल से छिपकर रह रही थीं. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार करने और डराने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं. माचाडो को भी खतरा था, इसी वजह से वह देश से बाहर नहीं निकल पा रही थीं.
