वह साल 2023 था और तारीख दिसंबर की 13 थी. सागर शर्मा और मनोरंजन डी नाम के दो नौजवान दर्शक दीर्घा से कूदकर लोकसभा के मेन हॉल में पहुंचे, फिर पीले रंग का धुआं छोड़ने वाला कैनिस्टर छोड़ दिया. अमोल शिंदे और नीलम देवी नाम के दो अन्य आरोपी नारे लगाते रहे. समय रहते चारों आरोपियों को पकड़ तो लिया गया, लेकिन उस दिन संसद की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए. इसके बाद एक बड़ा फैसला लिया गया और संसद की सुरक्षा को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सुपुर्द कर दिया गया.
वहीं, डिटेल रिव्यू के बाद 20 मई 2024 को सीआईएसएफ ने पार्लियामेंट हाउस कॉम्प्लेक्स की सिक्योरिटी को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया. साथ ही, पार्लियामेंट का एक्सेस कंट्रोल, पैरिमीटर सिक्योरिटी, इंटरनल सिक्योरिटी, काउंटर टेरर, काउंटर सबोटाज और फायर एंड डिजास्टर रिस्पॉन्स को पूरी तरह से अपने हाथों में लेने के बाद सीआईएसएफ ने बीते एक साल में पार्लियामेंट की सिक्योरिटी को एक नए लेवल पर शिफ्ट भी कर दिया है.
यह पहली बार है जब पार्लियामेंट की सिक्योरिटी को एयरपोर्ट की तरह एडवांस लेवल पर स्ट्रक्चर किया गया है. अब पार्लियामेंट में एंट्री हो या अंदर की मूवमेंट सब कुछ मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन, एडवांस्ड फ्रिस्किंग और एक्स-रे बैगेज चेकिंग के तहत ही होता है. सीआईएसएफ ने पार्लियामेंट हाउस कॉम्प्लेक्स की सिक्योरिटी के लिए 3,300 से ज्यादा स्पेशल ट्रेंड पर्सनल तैनात किया हैं, जिनमें 200 से ज्यादा फायर एंड डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट भी शामिल हैं. आपको बता दें कि सीआईएसएफ ने इन पर्सनल्स का सेलेक्शन एक खास प्रोसेस के तहत किया है.

