
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती आते ही नीतीश कुमार की स्मृतियों में वह दौर जीवंत हो उठता है जब राजनीति में संवाद, मर्यादा और विश्वास का महत्व हुआ करता था. नीतीश कुमार अक्सर कहते हैं कि अटल जी उन्हें बहुत स्नेह देते थे और बहुत भरोसा करते थे. नीतीश कुमार स्वयं कई बार कहते हैं कि केंद्र की राजनीति से लेकर बिहार की सत्ता तक, कई मोड़ों पर अटल जी का मार्गदर्शन नीतीश कुमार के साथ रहा. वह कहते हैं कि अटल जी की उदार सोच, समावेशी नेतृत्व और संवेदनशील व्यवहार ने नीतीश जी की राजनीतिक शैली को गहराई से प्रभावित किया. यही कारण है कि अटल जी की जयंती नीतीश के लिए केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर बन जाती है.
इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि अटल जी की पुण्यतिथि या जयंती पर नीतीश कुमार अक्सर चुपके से यानी बिना प्रचार के दिल्ली जाकर ‘सदैव अटल’ (अटल स्मारक) पर फूल चढ़ाते रहे हैं. वर्ष 2023 में भी जब वे महागठबंधन में थे तब भी उन्होंने अकेले जाकर श्रद्धांजलि दी थी. नीतीश कुमार के लिए यह व्यक्तिगत था. नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा में अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक थे जिनके साथ रिश्ता सत्ता, पद या मजबूरी से नहीं, बल्कि भरोसे और आत्मीय स्नेह से बना था.
