
एनडीए के ऐतिहासिक बहुमत के बीच यह कहानी शुरू होती है सीट बंटवारे के समय से, जब महुआ सीट को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान आमने-सामने हो गए. कुशवाहा इस सीट पर अपने बेटे की उम्मीदवारी चाहते थे, वहीं चिराग अपने नजदीकी संजय सिंह को मैदान में उतारने पर अड़े थे. मामला इतना उलझा कि दिल्ली तक हलचल मच गई. पटना में बीजेपी के बड़े नेताओं से लेकर दिल्ली में पार्टी हाईकमान तक कई दौर की बातचीत चली, लेकिन कुशवाहा पीछे हटने को तैयार नहीं थे. आख़िरकार, उन्हें महुआ सीट के बदले एमएलसी सीट का आश्वासन मिला और वहीं से इस किस्मत के खेल की कहानी शुरू हुई.
बिहार की राजनीति का अनोखा ट्विस्ट!
दरअसल, एनडीए को इस बार विधान सभा चुनाव में शानदार सफलता मिली है और सीटों का आंकड़ा 200 के पार चला गया. लेकिन, इस घटना की शुरुआत चुनाव के पहले सीट बंटवारे से शुरू होती है, जब उपेंद्र कुशवाहा महुआ सीट के लिए अड़ जाते हैं. इसी सीट पर लोजपा आर के चिराग पासवान भी अड़ गए कि महुआ सीट अपने सबसे करीबी माने जाने वाले संजय सिंह के लिए चाहिए. मगर मामला फ़िट नहीं हो रहा था सो बात दिल्ली दरबार तक पहुंच गयी.
