गाज़ा में ज़ुल्म का 586वां दिन है और इजरायल की ओर से बमबाजी अभी जारी है 586 दिन हो गए हैं जब से गाज़ा के मासूम लोग जंग,
भूख और बेघर होने का दर्द झेल रहे हैं। हर रोज़ की तरह आज भी वहां ज़िंदगी एक इम्तिहान बनी हुई है। बच्चों की चीखें, माँओं की दुआएं और इंसानियत की पुकार अब भी दुनिया के ज़मीर को झिंझोड़ने की कोशिश कर रही है इस दौर में खामोश रह जाना भी नाइंसाफ़ी को बढ़ावा देना है आइए, दुआ करें और इंसाफ़ की उम्मीद ज़िंदा रखें।