नाजिम खा पत्रकार कमालगंज

पन्ना से कौन वाकिफ नहीं. मध्य प्रदेश का ये जिला हीरों और पत्थर खदानों के लिए मशहूर है. यहां आए दिन किसी न किसी मजदूर की किस्मत चमक जाती है. कभी खदान में खनन के समय तो कभी पत्थर तराशते समय चमकता हीरा हाथ लग जाता है. पर, ये तो पन्ना का एक पक्ष है, जो खुशहाल है. एक दूसरा पक्ष भी है, जो बेहद डरावना है. खदानों में काम कर रहे मजदूर सिलिकोसिस बीमारी से जूझ रहे हैं.
फेफड़ों में पत्थर जैसी परत जमाने वाली इस लाइलाज बीमारी ने आधी उम्र में ही कई परिवारों को बेसहरा बना दिया है. महिलाओं को विधवा बना दिया है, बच्चों को अनाथ कर दिया है. गांधीग्राम, मनोर और बड़ौर जैसे गांवों में खदानों की धूल मजदूरों को अंदर ही अंदर खा रही है. पत्थर तोड़ते समय उड़ने वाली सिलिका सैंड सांस के जरिए फेफड़ों में जमा हो जाती है, जिससे सांस लेना दूभर हो जाता है.
