प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय ने रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए एक अनूठी पहल की है. वे संग्रहालय में आए बिना यहां रखे दुर्लभ अखिलेख देख सकेंगे. इनको सीमिट डिजीटल एक्सेस दिया जा सकेगा. इसमें वो दस्तावेज शामिल हैं, जो सबसे अधिक इस्तेमाल किए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) आजादी के बाद से सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने वाली प्रमुख संस्था है.
पीएमएमएल के निदेशक अश्वनी लोहानी शुरू की गयी अनूठी पहल के तहत इस दुर्लभ संग्रह (जिसमें दुर्लभ दस्तावेज, पत्र-व्यवहार, भाषण, डायरियां, समाचार-पत्र लेख आदि शामिल हैं) का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है. इससे दस्तावेजों का संरक्षण तो सुनिश्चित होगा ही, साथ ही वास्तविक शोधकर्ताओं को सीमित रिमोट एक्सेस भी मिल सकेगा, जो संग्रह सबसे अधिक उपयोग में लिया जाता है, उसे डिजिटाइज करके सिस्टम पर अपलोड कर दिया गया है और अब यह वास्तविक शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध है.
रिमोट एक्सेस के लिए एक विशेष आईटी प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसके जरिए वास्तविक शोधकर्ता पीएमएमएल परिसर में आए बिना ही डिजिटल अभिलेख देख सकेंगे. शोधकर्ताओं को इस प्लेटफॉर्म पर पहले पंजीकरण कराना होगा, उसके बाद वे अभिलेखीय दस्तावेजों को (केवल देखने के लिए) एक्सेस करने की मांग कर सकेंगे. स्वीकृत दस्तावेज शोधकर्ता के डेस्कटॉप पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे. डिजिटल अभिलेखों का यह शुरुआत ऐतिहासिक और संदर्भ सामग्री तक सीमित रिमोट एक्सेस देकर अभिलेखों के संरक्षण और शोधकर्ताओं को बेहतर अध्ययन का मौका मिलेगा. यह कदम आधुनिक और समकालीन भारत के विभिन्न पहलुओं पर शोध को आसान बनाने का प्रयास है.

