
30 अक्टूबर 2025 को कैनकून से न्यूयार्क जा रही ब्लूजेट का A320 प्लेन कुछ सेकेड्स के लिए पिच-डाउन हुआ. इस घटना में प्लेन में सवार करीब 15 पैसेंजर घायल हो गए. फ्रेंच एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (BEA) ने अपनी जांच इस घटना के लिए एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) को जिम्मेदार ठहराया. वहीं, एयरबस ने अपनी एनालिसिस में ELAC को सोलर रेडिएशन से जोड़ दिया. इसके बाद, यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने एक इमरजेंसी एयरवर्दिनेस डायरेक्टिव (ईएडी) जारी कर सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि A320 फैमिली के प्लेन्स को ELAC सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन के बिना उड़ने न दिया जाए.
वहीं, ईएडी को आधार बनाते हुए एयरबस ने भी एयरलाइंस ऑपरेटर्स के लिए अलर्ट ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन जारी कर दिया. नतीजा यह हुआ कि एयरबस ने A320 फेमली के प्लेन को ग्राउंड कर दिया गया. इस डेवलपमेंट की वजह से भारत सहित पूरी दुनिया में फ्लाइट्स कैंसिलेशन का सिललिसा शुरू हो गया. अब इस घटना को लेकर पैसेंजर्स के दिमाग मे पहला सवाल यह है कि सोलर रेडिएशन फ्लाइट सेफ्टी के लिए खतरा कैसे हो सकती है. साथ ही, कौतूहल इस बात को लेकर मचा हुआ है कि रेडिएशन से सिर्फ एयरबस के प्लेन्स को ही खतरा क्यों है? सोलर एडिएशन हमेशा से मौजूद रही हैं तो अब वह खतरनाक कैसे हो गई. तो आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं, इस सवाल का एविएशन एक्सपर्ट्स के नजरिए से जवाब.
